“आरंभ -उद्घोष 21वीं सदी का “अंतर्राष्ट्रीय साझा काव्य संकलन

सर्व प्रथम अनेक रचना शिल्पियों को साथ रखकर सुश्री अनु श्री द्वारा संपादित महाकाव्य संग्रह ‘आरंभ उद्घोष’ प्रकाशित करने के लिये आपका बहुत-बहुत धन्यवाद और आपके श्रम, दूरदृष्टि, संकल्पशक्ति तथा साहित्यप्रेम को नत शिर नमन। प्रथमतः संग्रह के आकर्षित कवर पृष्ठ को देखकर मन प्रफुल्लित और अभिभूत हो जाता हैं। सम्पादकीय अंश पढकर इस बात का एहसास हो जाता हैं कि आपने हर एक रचना को विरामादि ही नहीं बल्कि हकारादि स्वरूप को भी कई बार साफ़ सुथरा रंग देकर इंद्रधनुष जैसे सँवारा हैं। कविताओ के मुरझाए, थके हुए भावों को एक नव जीवन देने का प्रयत्न किया हैं।

यकीनन आप जैसे विद्वज्जन ही ऐसे काव्य संग्रह का धनुष उठाकर उसे वैभवता की कमान खींचकर कार्य सम्पन्न कर सकते हैं। यह कहना उचित होगा और हमारी कामना हैं कि आजकल के शब्दशिल्पियों के लिए आप एक प्रेरणादायी सम्पादक बन कर उभरते रहे।

इस अनमोल भागीरथ प्रयास के लिए पुनः आपका हृदय से आभार और साथ ही साथ बुक रिवर्स के प्रबंधक एवं उनके समस्त समूह को इस महत्त्वपूर्ण कार्य एवं प्रकाशन के लिए बहुत-बहुत हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ।

✒️ सूर्यकांत सुतार ‘सूर्या’
दार-ए-सलाम,
तंज़ानिया

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